बुआ सर का एक्ज़ीक्यूटिव आर्डर
दौर था 1994 का | कुछ ऐसा हुआ कि मेरे मन में ये सवाल
हमेशा के लिए सवाल बनकर रह गया कि ये एक्ज़ीक्यूटिव आर्डर क्या होता है? फिर दौर
आया गूगल का | हमने सर्च किया इस सवाल का जवाब, और गूगल ने हमें बताया कि, “Q: What is an Executive Order? A:
Executive orders are issued by the President of the United States, acting in
his capacity as head of the executive branch, directing a federal official or
administrative agency to engage in a course of action or refrain from a course
of action.” कुल मिलाकर बोले तो अभी
भी कुछ समझ नहीं आया |
ये कहानी दो व्यक्तियों
की नहीं है, बल्कि दो व्यक्तित्वों की है | एक तरफ झील के जैसे शांत KK सिंह सर और
दूसरी तरफ खतरनाक समुद्र के जैसे रौद्र और अन्प्रेडीक्कटेबल KS कटोच सर | किसी
भी कहानी को आगे बढाने के पहले किरदारों का परिचय बहुत ज़रूरी है | तो थोड़ी सी
मशक्कत इस विषय पर भी हो जाए तो अच्छा है |
KK सिंह सर सर्वेयरों के
बीच बुआ सर के नाम से मशहूर थे | इतने शांत इंसान को मैनें जीवन में कभी नहीं देखा
| हर किसी को वो “बुआ” कह के संबोधित करते थे , जिसके चलते उनका नाम ही “बुआ सर” पड
गया था | जूनियर मोस्ट सी-2 को भी वो कभी ऑर्डर नहीं देते थे , बस रिक्वेस्ट करते
थे , “बुआ , ये काम कर दो.” कहते समय उनके चेहरे पे ऐसा दर्द छलकता था कि सी-2
सारे काम छोड़कर उनका काम करने लग जाता था. इतने अहिंसावादी कि मच्छर या खटमल काटे
तो उसको भी प्यार से बोल देते थे ,”हाँ बुआ,तुम भी थोडा खून पी लो .” 14 साल की
सर्विस, मगर आज तक बुआ सर ने किसी को भी कोई आर्डर नहीं दिया | प्रेम-पुजारी थे और
प्रेम ही उनके जीवन की साधना थी |
दूसरी तरफ दिल्ली के KS
कटोच सर या कुलदीप सिंह कटोच सर अपने ज़माने के खतरनाक किरदार हुआ करते थे .
ह्रिष्ट-पुष्ट शरीर के धनी कटोच सर किसी से भी दो-दो हाथ करने को सदैव तैयार रहते
थे | उनके किरदार के वर्णन के लिए एक किस्से का बखान बहुत ज़रूरी है | कटोच सर
सर्विस में कभी MLR नहीं बने | सरजी जब निरूपक में थे तो उनकी शादी हो गई थी |
भाभीजी ने शायद कहा कि मुझे भी साथ ले चलो , लेकिन सरजी ने मन कर दिया | बात बढती
चली गयी | भाभीजी की पहचान उस समय के एडमिरल विष्णु भागवत तक थी | CNS का सन्देश
CNC के थ्रू शिप के कप्तान तक पहुँचा कि कटोच सर को MLR बनाया जाए | कटोच सर ने साफ़
मन कर दिया | सी. ओ. साब थे कमांडर अशोकन सर, उन्होंने केबिन में बुलाकर कटोच सर
से कारण पूछा | कटोच सर ने जवाब दिया , “Sir, I cannot serve two Masters at a time”. सी. ओ. साब भी दहल गए, शादी-शुदा थे इसलिए बात
की गहराई भी समझ गए |
मगर बात यहाँ ख़त्म नहीं
हुई . एडमिरल विष्णु भागवत साब भी चिन्दिगिरी में माहिर थे. थे तो एडमिरल,
मगर काम दरिद्दरों वाला करते थे | मुंबई में जब सी-एन-सी हुआ करते थे तो उनके गाडी
के पीछे पीछे रेगुलेटिंग वालों की गाडी चलती थी | जो कोई बंदा सेल्यूट ना मारे,
उसका नाम-नंबर तुरंत नोट हो जाता था , अगले दिन शिप में फर्रा आता और या तो नंबर
11 या नंबर 12 या फिर जी.सी.बी. का जाना तय था. मुंबई सर्वे के दौरान सतलज के काफी
बन्दे इसका शिकार हुए | तो बात आन बैठी की सी-एन-एस के कहने पर भी कटोच सर एमएलआर
नहीं बने | उन दिनों सी-एन-सी वेस्ट और जहाज के सी.ओ. साब के 2 ही काम थे. एक -
कमांड संभालिये, दो – कटोच सर को एमएलआर बनाना है. खैर कटोच सर किसी भी तरह पकड़
में ना आये . दौर था 1998 का | फायनली सूचना मिली कि कटोच सर को सर्विस से
टर्मिनेट किया जाएगा और उनको घर भेजकर एमएलआर बनाया जाएगा | मगर कटोच सर तो कटोच
सर निकले ....
And rest is
history...................
30 December 1998 को एडमिरल विष्णु भागवत को ही सर्विस से निकाल दिया गया |
अब सीधे कहानी पर आते
हैं. मुंबई सर्वे सतलज के बहुत ही परिश्रमी सर्वे में से एक था . सतलज की 4 बोट
हुआ करती थी. पोलोक, पिट्रेल, सी-गल और सालमोन. सारे बोट सुबह-सुबह चार दिशाओं में
रवाना होती थी और शाम को शिप में लौटकर आती थी. साल्मोन बोट के साउंडर (ऑफिसर-इन-चार्ज) बुआ सर थे और कोक्सन कटोच सर थे. बहुत मजे से सर्वे के दिन चल रहे
थे. शांत प्रकृति के बुआ सर आराम से बैठते थे और कटोच सर के कमांड में कोई और चूं
तक नहीं करता था .
फिर आया हादसे का वो दिन.
और दिनों की तरह ही उस दिन भी सालमोन लोड होकर सुबह सुबह चल पड़ी . बुआ सर और कटोच
सर के अलावा रोहन जॉन, RB सिंह , JN श्रीवास्तव सर और मेरा बैची खडन्ग भी उस बोट में थे. गल आयलेंड के
पास में शोर पार्टी को उतारने के पश्चात बोट काम में जुट गयी. शाम तक
निर्बाध रूप से कार्य चलता रहा . शाम को अचानक सी थोडा रफ हो गया . आईलेंड में शोर
पार्टी फंसी पड़ी थी . मामला रिस्की था. कटोच सर ने बोट को आईलेंड में ले जाने से
मना कर दिया .
बुआ सर ने प्रेम से कहा, “अरे
बुआ , ले लो ना बोट किनारे की तरफ “
कटोच सर ने साफ़ मन कर
दिया .
ये बहस कोई 10 मिनिट के
करीब चली |
फिर बुआ सर ने जीवन में
पहली बार आर्डर दिया | बोले , “बुआ , आई एम् गिविंग यु ऑर्डर , टेक द बोट टू
आयलेंड “
कटोच सर ने भी बोला , “
सर , आय रिफ्युस टू ओबे योर आर्डर “
बुआ सर सकते में आ गए .
उनके तरकश के सारे बाण ख़तम हो चुके थे . एक तो पहली बार जीवन में ऑर्डर दिया , वो
भी रेफ्युस हो गया . अब क्या करें ? बड़ी दुविधा थी . फिर से कहा , “बुआ , ले चलो
ना बोट”.... फिर से मनाही आ गयी.
हारकर बुआ सर ने कटोच सर
से ही पुछा , “ ऐसा क्या करूँ कि तुम बोट को आयलेंड लेकर जाओगे ?”
कटोच सर ने कहा, “सर, गिव
मी एक्सिक्यूटिव आर्डर”.
बुआ सर की आँखें चमक उठी.
अँधेरे में उजाले की एक किरण दिख पड़ी. आज उनकी दयालु आँखों में खून उतर आया ,
भुजाएं फड़क उठी, मुखमुद्रा रौद्र भाव से तप उठी , कटोच सर की आँखों में आँखें
डालकर बुआ सर दहाड़ पड़े , “लीडिंग सीमेन कटोच, आय एम् गिविंग यु एन एक्सिक्यूटिव आर्डर
, टेक द बोट टू आयलेंड “
कटोच सर भी सावधान में
आकर रेस्पोंड किये , “आय आय सर”
कटोच सर ने बोट को आयलेंड
की तरफ मोड़कर फुल थ्रोटल दिया and the rest
is History......
सालमोन चट्टान से टकराकर डूब गयी . सारे क्र्यू तैरकर आयलेंड
में पहुँच गए. जान का नुकसान नहीं हुआ लेकिन सारे सर्वे इक्विपमेंट डूब गए . मेरे
बैचमेट दिवंगत आधिकराव विठ्ठलराव खडंग ने बड़ी वीरता के साथ डायविंग करके काफी
सामान निकाला जिसके लिए बाद में उसे कमेंडेशन भी मिला . बड़ी मशक्कत के बाद पूरी
टीम को आयलेंड से रेस्क्यू किया गया .
उपसंहार :
1. महीनों तक बोर्ड ऑफ़ इंक्वायरी चलती रही . सारे
बन्दे काम में लगे रहते और सालमोन पार्टी नंबर 2 पहन के चल पड़ती थी . आलम ये था कि
लोगों को लगने लगा कि काश हम भी सालमोन के क्र्यू होते .
2. कटोच सर ने अपने स्टेटमेंट में भी लिखा , “आय
हेव रीसिव्ड एन एक्सिक्यूटिव ऑर्डर टू टेक द बोट टू आयलेंड एंड आय फोलोड इट”
3. बुआ सर इस घटना के बाद काफी विचलित और दुखी
रहते थे . कई बार नींद में ही बुदबुदा उठते थे . कहते थे , “बुआ, एक्सिक्यूटिव
ऑर्डर नहीं देना था “ | उस दिन से हमारे मन में हमेशा शंका रहती थी कि ये
एक्सिक्यूटिव ऑर्डर क्या बला है? भगवान् कसम, आज तक जे बात हमारे समझ ना आई .
4. महीनों की बोर्ड ऑफ़ इंक्वायरी के बाद सारे लोग
साफ़ बरी हो गए . केस को राईट ऑफ कर दिया गया .
5. True to his words, Katoch Sir is proudly serving single master (Bhabhiji) at home town Delhi.
6. कटोच सर और बुआ सर से लेखक क्षमाप्रार्थना
करता है और अपील है कि अगर हमारी कुटाई करना है तो अकेले में बुलाकर कीजियेगा |
नोट : यूँ तो कहानी को
मजेदार बनाने के लिए एक छोटी सी घटना को नमक-मिर्च लगाकर पेश किया गया है. ये कथा
बोट में दो मित्रों के बीच हुई क्षणिक चुहलबाजी की रोचक प्रस्तुति मात्र है.
अगर वास्तविकता देखी जाए
तो उस दिन समुन्दर की स्थिति काफी खराब थी. सर्वेयरों को “पायनियर ऑफ़ विर्जिन सी”
कहा जाता था . अर्थात किसी जगह की गहराई या खतरों के बारे में पूर्वानुमान ना होते
हुए भी जान हथेली पे लेकर उन जगहों में जाया करना हमारे प्रोफेशन का हिस्सा रहा है
. हम खतरा उठाते थे, ताकि हमारे पीछे आनेवालों के साथ कोई दुर्घटना ना होए . आज भी
समुद्र की गहराई के रहस्यों को जानने के लिए मरीन सर्वेयर ही जोखिम उठाते हैं.
फक्र है हमें कि ऐसे प्रोफेशन से ताल्लुक रखते हैं जिसमें हर रोज़ जिंदादिली का
एहसास होता है .
(समाप्त)